सोमवार, 21 सितंबर 2026

जगलाल हाई स्कूल भागलपुर

👉 “भागलपुर में परीक्षा देने जा रहे हैं? तो रेकाबगंज का यह पता जरूर जान लीजिए—जगलाल हाई स्कूल और आदर्श परीक्षा परिसर आखिर कहां है
भागलपुर के रेकबगंज चौक पर मौजूद जगलाल हाई स्कूल और इसके आसपास का आदर्श परीक्षा परिसर… आखिर इस जगह की क्या खासियत है? यहां पढ़ाई के साथ-साथ किस तरह की परीक्षाएं आयोजित होती हैं? आज के इस वीडियो में जानते हैं इस परीक्षा परिसर की पूरी कहानी।”
1️⃣ जगलाल हाई स्कूल और आदर्श परीक्षा परिसर का परिचय
भागलपुर शहर के रेकबगंज चौक/कंपनीबाग क्षेत्र में स्थित जगलाल हाई स्कूल लंबे समय से शिक्षा और परीक्षा गतिविधियों से जुड़ा परिसर है। इसी क्षेत्र में स्थित आदर्श परीक्षा केंद्र/परीक्षा परिसर में ऑनलाइन एवं प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन भी किया जाता है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार आदर्श परीक्षा परिसर में चार फ्लोर पर लगभग 1,168 कंप्यूटर लगाए गए हैं और इसे कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट सेंटर के रूप में संचालित किया जा रहा है। यहां BSEB patna का ब्रांच भी है।अगर किन्हीं को मैट्रिक डॉक्यूमेंट संबंधी कार्य करवाना हो तो यहां से भी हो जाएगा।
2. आखिर आदर्श परीक्षा परिसर इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
भागलपुर के रेकाबगंज क्षेत्र में स्थित जगलाल हाई स्कूल और आदर्श परीक्षा परिसर परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान के रूप में जाना जाता है। यहां समय-समय पर विभिन्न प्रकार की परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है, जिसके कारण परीक्षा के दिनों में इस क्षेत्र में अभ्यर्थियों की काफी आवाजाही देखने को मिलती है।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर बड़ी संख्या में विद्यार्थी यहां परीक्षा देने क्यों पहुंचते हैं? परीक्षा केंद्र की व्यवस्था कैसी है? अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान किन नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है? और परीक्षा देने के बाद उनका अनुभव कैसा रहता है?
किसी भी परीक्षा केंद्र की पहचान केवल उसके भवन से नहीं होती, बल्कि वहां की परीक्षा व्यवस्था, तकनीकी सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था, प्रवेश प्रक्रिया और अभ्यर्थियों की सुविधा भी महत्वपूर्ण होती है।
अगर आपने भी जगलाल हाई स्कूल या आदर्श परीक्षा परिसर, रेकाबगंज में कभी परीक्षा दी है, तो अपने अनुभव को कमेंट में जरूर साझा करें। आपका अनुभव किसी दूसरे अभ्यर्थी के लिए उपयोगी हो सकता है।
3. जगलाल हाई स्कूल भागलपुर रेकाबगंज कंपनीबाग का क्षेत्र कहलाता है। यहां आप भागलपुर जंक्शन से नाथनगर वाले रास्ते में बीच में ही है।बीच में परबत्ति चौक से पहले ही है।
यहां ऑटो, टोटो rickshaw,car किसी भी सुविधा से आ सकते हैं आप।
4. इसके आस पास ठहरने के लिए अच्छे और सस्ते होटल, रेस्टोरेंट, रूम उपलब्ध हैं।फिर भी exam है तो ट्रैफिक,एग्जाम टाइम,दूरी, ये सब ध्यान में रख कर निकले।
Disclaimer (अस्वीकरण)
इस ब्लॉग पर दी गई जानकारी (जैसे Jaglal High School एग्जाम सेंटर का रास्ता और गाइडलाइन्स) केवल छात्रों की मदद के लिए है। हम सटीक जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन 100% सटीकता की गारंटी नहीं देते।
सेंटर पर जाने से पहले अपने Official Admit Card को जरूर चेक करें।
ट्रैफिक या यात्रा में किसी भी तरह की देरी/असुविधा के लिए यह ब्लॉग जिम्मेदार नहीं होगा। छात्र समय से पहले निकलें।



शुक्रवार, 18 सितंबर 2026

बापू परीक्षा परिसर कुम्हरार पटना

बापू परीक्षा परिसर कुम्हरार पटना में अगर आपका परीक्षा केंद्र है तो ये ब्लॉग आपके लिए है।आगे बापू परीक्षा परिसर से जुड़ी सारी जानकारी प्राप्त करें।ताकि आसानी से परीक्षा केंद्र तक पहुंचे।

बापू परीक्षा परिसर कुम्हरार पटना jankari🙏✍️
बापू परीक्षा परिसर, कुम्हरार, पटना बिहार में बड़े पैमाने पर परीक्षाएं आयोजित करने के लिए बनाया गया आधुनिक परीक्षा परिसर है। यहां ऑनलाइन (CBT) और ऑफलाइन दोनों तरह की परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं।
एक साथ कितने परीक्षार्थी परीक्षा दे सकते हैं?
बापू परीक्षा परिसर की क्षमता को लेकर अलग-अलग समय पर अलग-अलग आंकड़े प्रकाशित हुए हैं।
2023 में परिसर के उद्घाटन के समय प्रकाशित जानकारी के अनुसार ब्लॉक A और B में 22-22 परीक्षा हॉल थे और प्रत्येक हॉल में लगभग 470 परीक्षार्थियों के बैठने की व्यवस्था बताई गई थी। यानी केवल इन 44 हॉल की लगभग 20,680 सीट बनती है।
इसमें मुख्य रूप से आठ गेट है।आगे में गाड़ी की पार्किंग भी हैं। गेट न 1 एवं 2 ज्यादा संचालित होती है।
ये लगभग आठ एकड़ में फैला परीक्षा परिसर है।
ये परीक्षा परिसर दूर से ही दिखती है।बापू की तस्वीर इसके सामने ऊपर है।
यहां बिहार बोर्ड, बीपीएससी, एसएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित हो सकती हैं।
परिसर में CCTV कैमरे, जैमर और वेबकास्टिंग जैसी सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
बापू परीक्षा परिसर कुम्हरार कैसे जाए🙏✍️
यहां आने के लिए सबसे नजदीक होगा राजेन्द्रनगर टर्मिनल स्टेशन से आगम कुआँ वाले रास्ते में बीच में ही ये पड़ता है । फ्लाईओवर ब्रिज के नीचे बाइपास के पास। कुम्हरार क्षेत्र कहलाता है ये । आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित बिहार का गौरव माना जाता है इसे।बिहार का सबसे बड़ा परीक्षा परिसर कुम्हरार पटना में है।कभी कभी परीक्षार्थी बापू सभागार और बापू परीक्षा परिसर में भ्रमित हो जाते हैं। लेकिन बापू परीक्षा परिसर कुम्हरार में है याद रखे हमेशा। और बापू सभागार अलग है।
संयम अनुशासन सावधानी  🙏✍️ 
चुकी ये परीक्षा परिसर कुम्हरार में है और बहुत बड़ा है।रोड किनारे है।यहां की विधि व्यवस्था बहुत अच्छी है। कदाचार मुक्त परीक्षा परिसर है।
यहां सिर्फ परीक्षा परिसर में प्रवेश से पहले गेट पर चेकिंग होती है। यहां प्रवेश पत्र के साथ एक Identity proof document साथ में जरूर ले।उसकी original और फोटो प्रति साथ रखे। मोबाइल इत्यादि बैग ये सब गेट पर ही जमा हो जाता है।
यहां परीक्षा दे रहे परीक्षार्थी परीक्षा समाप्ति के दौरान सावधानी से एक दूसरे का सहयोग करते हुए अनुशासन में गेट से बाहर पंक्ति में धीरे धीरे निकले। 
रहने ठहरने की व्यवस्था 🙏✍️
कुम्हरार में भी कई होटल ,रेस्टोरेंट है। धर्मशाला है।
अगमकुंआ में भी रहने ठहरने की व्यवस्था है।
राजेंद्र नगर स्टेशन के आस पास भी रहने ठहरने की व्यवस्था है। इन सभी जगह से आप आसानी से परीक्षा परिसर कुम्हरार पहुंच सकते हैं। आपके पास आधार कार्ड साथ में एक गार्जियन हो तो बहुत अच्छा होगा आपके लिए। खाना नाश्ता पानी के लिए भी अच्छे और सस्ते होटल इत्यादि है यहां।
आसपास के क्षेत्र,🙏✍️
मौर्या विहार कॉलोनी / मौर्या बिहार कॉलोनी — परीक्षा परिसर इसी क्षेत्र में स्थित है।
कुम्हरार — मुख्य स्थानीय इलाका।
कुम्हरार बाईपास रोड — आने-जाने का प्रमुख मार्ग।
कुम्हरार गुमटी क्षेत्र — आसपास का जाना-पहचाना स्थानीय क्षेत्र।
अशोक बिहार — कुम्हरार गुमटी के आसपास।
आदिवासी कॉलोनी — बिस्कोमान गोलंबर की दिशा में।
बजरंगपुरी और गायघाट — अपेक्षाकृत नजदीकी इलाके।
कंकड़बाग — कुम्हरार से जुड़ा प्रमुख आवासीय और बाजार क्षेत्र।
सभी परीक्षार्थी को एग्जाम के लिए बेस्ट ऑफ luck।समय ट्रैफिक दूरी को ध्यान रखते हुए। परीक्षा केंद्र के लिए निकले आप।
परीक्षा केंद्र के पास रहने या होटल खोजने के लिए Google Maps में “Maurya Vihar Colony Kumhrar Patna 800026”, “Bapu Pariksha Parisar” या “Kumhrar Bypass Road” bapu pariksha parisar kumhrar, बापू परीक्षा परिसर कुम्हरार,,वगैरह लिखकर खोजें। अलग-अलग परीक्षा में गेट और ब्लॉक बदल सकते हैं, इसलिए अंतिम स्थान अपने एडमिट कार्ड से मिलाएं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी अनेक विश्वसनीय स्रोतों और हमारे व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए संकलित की गई है। जानकारी सही रखने का पूरा प्रयास किया गया है; हालांकि समय के साथ मार्ग, स्थान या सुविधाओं में बदलाव संभव है। यात्रा से पहले नवीनतम जानकारी आधिकारिक या विश्वसनीय स्रोत से अवश्य सत्यापित करें।




बुधवार, 16 सितंबर 2026

🌱 टॉल पॉपी सिंड्रोम: जब सफलता से लोग जलने लगते हैं | Psychology Shorts

इस वीडियो में जानिए टॉल पॉपी सिंड्रोम क्या है—क्यों कुछ लोग दूसरों की सफलता देखकर критиा, जलन या बूलिंग करते हैं। ऑस्ट्रेलिया से आया यह टर्म अब वर्कप्लेस और सोशल मीडिया दोनों में देखा जाता है।�
अगर आपको लगता है कि आपकी सफलता से लोग असहज हैं, तो ये वीडियो आपके लिए है।
हम आपस में दस भाई हैं।सभी पढ़े लिखे सक्षम है। अपने पैरों पर खड़े है। अच्छी कमाई हो रही है। गुज़र बादर ईश्वर की कृपा से ठीक है। लेकिन हमलोग जब भी अपने बाप दादा की जमीन घेरने जाते हैं।कुछ कम संख्या और आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति हमें रोक देता है।
 क्या यही टॉल पॉपी सिंड्रोम है। चलिए आगे इसे समझते
 हैं।
🌱 टॉल पॉपी सिंड्रोम क्या है?
“Tall Poppy” का अर्थ है—खेत में सबसे ऊँचा उगा हुआ फूल। रूपक यह है कि जो व्यक्ति सबसे ऊपर दिखाई देता है, उसे काटकर बाकी के बराबर कर दिया जाए।
मानसिकता कुछ ऐसी हो सकती है:
✍️“यह इतना आगे कैसे निकल गया?”
“✍️इसमें ऐसा क्या खास है?”
“✍️अभी तो बहुत कुछ करना बाकी है।”
“✍️ज्यादा उड़ने लगा है।”
“✍️इसे ज्यादा महत्व मत दो।”
✍️🙏यह हमेशा जानबूझकर दुश्मनी नहीं होती। इसके पीछे ईर्ष्या, तुलना, असुरक्षा, हीनभावना, सामाजिक दबाव या बदलाव को स्वीकार न कर पाना जैसे कारण हो सकते हैं।
🌱 टॉल पॉपी सिंड्रोम और अपने लोगों का प्रभाव🙏✍️
कभी-कभी किसी व्यक्ति की सफलता, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक प्रतिष्ठा या सामाजिक प्रभाव बढ़ने पर उसके आसपास के कुछ लोगों में तुलना, असुरक्षा या ईर्ष्या पैदा हो सकती है। वे उसकी उपलब्धि को स्वीकार करने के बजाय उसे छोटा दिखाने या नीचे खींचने की कोशिश कर सकते हैं।
यहीं से आपसी मतभेद बढ़ने लगते हैं।✍️🙏
और जब अपने ही लोग आपस में बंट जाते हैं, तो इसका फायदा अक्सर तीसरे लोग उठा सकते हैं।
“कभी-कभी समस्या दुश्मन की ताकत नहीं होती,
बल्कि अपनों के बीच पैदा हुई दूरी होती है।”
✍️🙏संख्या अधिक होने के बावजूद अगर आपस में विश्वास, संवाद और एकता नहीं है, तो सामूहिक ताकत कमजोर पड़ सकती है।
✍️🙏इसलिए यह जरूरी नहीं कि जो व्यक्ति आर्थिक, मानसिक, पारिवारिक या सामाजिक रूप से कमजोर दिखाई देता है, वह प्रभावहीन भी हो। संबंधों की समझ, रणनीति, सूचना और लोगों को प्रभावित करने की क्षमता किसी व्यक्ति के वास्तविक प्रभाव को बदल सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात
✍️🙏“दुश्मन से सावधान रहना जरूरी है, लेकिन अपने लोगों के बीच विश्वास टूटने से बचाना उससे भी जरूरी है।”
🙏✍️इसका समाधान किसी को दुश्मन मानना नहीं, बल्कि:
✍️आपस में खुलकर बातचीत करना
✍️गलतफहमी तुरंत दूर करना
✍️सफलता पर एक-दूसरे को प्रोत्साहित करना
✍️तुलना और तानों से बचना
✍️बाहरी व्यक्ति की बात पर तुरंत विश्वास न करना
✍️महत्वपूर्ण मामलों में तथ्य देखकर निर्णय लेना
और जरूरत पड़ने पर स्वस्थ सीमाएँ बनाना
✍️😭एकता का अर्थ हर बात में सहमत होना नहीं है; असहमति के बावजूद एक-दूसरे के प्रति विश्वास और सम्मान बनाए रखना है।
✍️😭एक सरल कहानी🙏✍️
“गाँव का सबसे ऊँचा पौधा”
एक गाँव में अमन नाम का लड़का रहता था। परिवार साधारण था। अमन पढ़ाई में अच्छा था और उसका सपना था कि वह प्रतियोगी परीक्षा पास करके अच्छी नौकरी करे।
गाँव के कुछ लोग कहते—
“अरे, हमारे गाँव से कौन अधिकारी बना है?”
लेकिन अमन चुपचाप पढ़ता रहा।
कुछ साल बाद उसका चयन हो गया।
घर में मिठाई बंटी। माता-पिता बहुत खुश हुए।
लेकिन धीरे-धीरे कुछ रिश्तेदारों की बातें बदलने लगीं।
पहले कहते थे—
“अमन बहुत मेहनती लड़का है।”
अब कहने लगे—
“नौकरी लग गई तो क्या हुआ?”
कोई कहता—
“✍️अब तो अमन हम लोगों को पहचानता भी नहीं होगा।”
कोई उसकी सफलता में कमी खोजता।
अमन को बुरा लगने लगा। उसने सोचा—
“क्या मेरी सफलता से मेरे अपने लोग मुझसे दूर हो रहे हैं?”
✍️एक दिन उसके पिता ने उसे खेत में ले जाकर एक ऊँचे पौधे की तरफ इशारा किया।
उन्होंने कहा—
“बेटा, खेत में जो पौधा सबसे ऊँचा होता है, उस पर सबसे पहले सबकी नजर जाती है। लेकिन ऊँचा होना गलत नहीं है। तुम्हारा काम पौधे की तरह बढ़ते रहना है।”
अमन समझ गया।
उसने न तो रिश्तेदारों से लड़ाई की और न ही अपनी सफलता छिपाई।
उसने बस तीन बातें तय कीं—
✍️सम्मान सबको,
✍️सलाह चुनिंदा लोगों की,
✍️और निर्णय अपने लक्ष्य के अनुसार।
कुछ वर्षों बाद अमन ने अपने गाँव के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया।
🙏✍️तब वही लोग कहने लगे—
“अमन ने सच में अच्छा किया।”
कहानी की सीख
✍️🙏आपके बढ़ने से अगर किसी को असहजता होती है, तो हर बार अपनी ऊँचाई कम करना समाधान नहीं है।
लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि हर आलोचक आपका दुश्मन है।
✍️समझदार व्यक्ति यह पहचानता है कि कौन उसे नीचे खींच रहा है और कौन उसे गिरने से बचा रहा है।
यही Tall Poppy Syndrome को समझने का सबसे व्यावहारिक तरीका है।
सफल होने के लिए इससे कैसे बचें?🙏✍️
1. हर आलोचना को दुश्मनी मत समझिए।
पहले देखिए कि सामने वाला सही बात बता रहा है या केवल हतोत्साहित कर रहा है।
2. अपनी सफलता का प्रदर्शन कम, काम ज्यादा करें।
हर उपलब्धि बताना जरूरी नहीं है।
3. तुलना के खेल से बाहर निकलें।
आपका लक्ष्य दूसरों से आगे निकलना नहीं, बल्कि कल से बेहतर होना हो सकता है।
4. सही लोगों का छोटा लेकिन मजबूत समूह बनाइए।
जो आपकी सफलता देखकर खुश हों और गलती होने पर ईमानदारी से समझाएँ।
5. रिश्ते खत्म करने की बजाय सीमाएँ तय करें।
हर नकारात्मक व्यक्ति से लड़ना जरूरी नहीं।
6. आलोचना से सीखिए, ताने से नहीं टूटिए।
✍️🙏रिश्तेदार कैसे प्रभावित कर सकते हैं?✍️🙏
🙏रिश्तेदारों की प्रतिक्रिया अलग-अलग हो सकती है।
🙏सकारात्मक प्रभाव
🙏सलाह देना
🙏अवसरों की जानकारी देना
🙏प्रोत्साहित करना
🙏नेटवर्क से जोड़ना
🙏कठिन समय में सहयोग करना
✍️🙏नकारात्मक प्रभाव
✍️बार-बार तुलना करना
✍️उपलब्धि को छोटा बताना
✍️अफवाह फैलाना
✍️निराश करना
✍️अनावश्यक आलोचना करना
✍️असफलता का इंतजार करना
✍️🙏ध्यान रखें—हर आलोचना Tall Poppy Syndrome नहीं होती। कभी-कभी रिश्तेदार की आलोचना वास्तव में उपयोगी सलाह भी हो सकती है।
डिस्क्लेमर:- यह सामग्री केवल सामान्य शैक्षिक एवं मनोवैज्ञानिक जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। “Tall Poppy Syndrome” किसी व्यक्ति, परिवार, रिश्तेदार या समुदाय पर आरोप लगाने अथवा उनकी नीयत तय करने का आधार नहीं है। उदाहरण और विचार केवल समझाने के लिए हैं; इन्हें किसी वास्तविक व्यक्ति या घटना से जोड़कर न देखा जाए। जानकारी अनेको स्रोत से संकलित किया गया है।कुछ खुद का अनुभव है।किसी भी लिखावटी भूल के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ।

represented by qrb

जगलाल हाई स्कूल भागलपुर

👉 “भागलपुर में परीक्षा देने जा रहे हैं? तो रेकाबगंज का यह पता जरूर जान लीजिए—जगलाल हाई स्कूल और आदर्श परीक्षा परिसर आखिर कहां है ...