जब शुरू में जिंदगी की शुरुआत हुई सिर्फ पति पत्नी कुछ दिन सबकुछ सामान्य रहा।हंसी खुशी का माहौल।फिर कुछ दिन बाद घर में खुशखबरी आई। मां बनने की।घर का माहौल उत्साहित हो गया।दादा दादी या नाना नानी दोनों मिलकर नए मेहमान के स्वागत में उत्साहित रहते हैं।घर का पहला बच्चा।।
मां का विशेष ध्यान दिया जाता है खानपान साफ सफाई घर का माहौल सब पर ध्यान दिया जाता है।(पर इस बड़े बेटे रूपी मेहमान जो अभी अबोध है दुनिया भी नहीं देखी ।जिसके इंतजार में खुशिया मनाई जा रही है फिर आगे चलकर ऐसा क्यों और क्या हो जाता है कि घर में इसकी इज्जत नहीं रह जाती)
समय पूरा नए मेहमान आ गए ।बधाई हो लड़का हुआ।मिठाई बांटी जाने लगी।ये पूरे घर का केंद्र है। घर का पहला बच्चा बेटा। समारोह/पूजा/भोज सभी अपने अनुकूल समारोह करते हैं। ये बच्चा किसी को माँ ,मौसी, फुआ, नानी,दादी,चाची तो किसी को पापा,चाचा,मौसा,मामा,दादा,दादी,नाना,फूफा की उपाधि दे दिया।चुकी घर में पहला बच्चा है सभी के शौक अरमान जुड़े है।सभी का प्यारा है।
कुछ समय सब ठीक चलता है। बच्चे बड़े होते हैं बड़े का प्यार आशीर्वाद मिलता है।कुछ दिन बाद अचानक पता चला फिर से दूसरे मेहमान आने वाले हैं।
खुशी होती है पर पहली खुशी पहला अनुभव वाली बात नहीं होती। ये सामान्य व्यवहार है। दूसरे मेहमान भी बेटा ही आए।
पहले बड़े बेटे की उम्र 10वर्ष हो गई। छोटा अभी छोटा है।
फिर भी बचपन में मां बाप ने क्षमता अनुसार प्यार बराबर दिया। कुछ भी खाना ,कपड़ा,खिलौना दोनों को दिलवाया गया। साइकिल पर दोनों को घुमाया गया।समय के साथ बड़े बेटे ने जिम्मेदारी संभाली/
बड़े बेटे ने मां पिताजी के परेशानी कष्ट को देखा ।थोड़ा बहुत जिम्मेदारी उठाएं। बड़े ने कुछ मांगा उसे समझाया गया।मजबूरी बताई गई।उसके खुद भी अनुभव किया। क्योंकि बड़े बेटे ने मां के त्याग ओर पिता की मेहनत और बच्चों के लिए अपनी खुशी अरमान को त्यागते मां बाप को देखा होता है।
इसलिए अक्सर लगभग हर घर का बड़ा बेटा जिद्दी, बदमाश,खर्चीला नहीं होता है।(ऐसे दुनिया में अपवाद की कमी नहीं है)
घर का बड़ा बेटा: बचपन से ही जिम्मेदारियों का सफर
घर का बड़ा बेटा अक्सर बचपन से ही परिवार की उम्मीदों का केंद्र बन जाता है। जब वह छोटा बच्चा होता है, तब भी उससे समझदारी, जिम्मेदारी और त्याग की उम्मीद की जाने लगती है।फिर
बचपन में वह भी खिलौनों, खेल और शरारतों में खोना चाहता है, लेकिन धीरे-धीरे उसे सिखाया जाता है कि छोटे भाई-बहनों का ध्यान रखना है, माता-पिता की मदद करनी है और परिवार का सहारा बनना है।
कई बार बड़ा बेटा अपनी छोटी-छोटी इच्छाओं को दबा देता है ताकि घर के दूसरे सदस्यों की जरूरतें पूरी हो सकें। उसकी मुस्कान के पीछे कई अनकही जिम्मेदारियां छिपी होती हैं।
बड़ा बेटा सिर्फ परिवार का सदस्य नहीं होता, वह अक्सर माता-पिता की उम्मीदों, भाई-बहनों के मार्गदर्शन और घर की मजबूती का आधार बन जाता है।
फिर कुछ दिन बाद मा पिता दोनों मिलकर दोनों बच्चे का नाम लिखवाते है।सपने देखते हैं।उनके भविष्य की चिंता करते हैं। आमदनी कम होने से मध्यम वर्ग के परिवार में सीमित खर्च और आमदनी होती है। जिम्मेदारी बड़ी होती हैं। जिसे बड़ा बेटा नज़दीक से महसूस करता है देखता है।की कितनी जद्दोजहद परेशानी के बाद मा पिताजी जरूरी चीजें पूरी करते हैं। उन्हें बच्चों के भविष्य के लिए भी कुछ करना है।
देखते देखते एक seven ओर एक three वर्ग में चला जाता है।घर खर्च बढ़ता है।आमदनी सीमित है। और अब यही से शुरू होती है बड़े बेटे की अग्निपरीक्षा।बड़ा बेटा वरदान या अभीशाप। आखिर क्यों परिवार में सबसे ज्यादा बड़ा बेटा ठगा जाता है।।जानने के लिए पढ़े बड़ा बेटा part 2
पिताजी नौकरी में हैं।स्कूल फीस, घर खर्च, रूमरेंट, दूध, डाक्टर खर्च पर्व, त्यौहार,नेवता सबकुछ एक ही पर आश्रित। सबकुछ उन्हें ही पूरा करना है।
डिस्क्लेमर - डिस्क्लेमर:
इस ब्लॉग में दी गई सभी जानकारी एवं विचार मेरे व्यक्तिगत अनुभव और समझ पर आधारित हैं। इसका उद्देश्य केवल अपने अनुभवों को साझा करना है। अलग-अलग स्थान, परिस्थितियों और लोगों के अनुभवों में भिन्नता हो सकती है। कृपया इसे किसी व्यक्ति, स्थान या घटना से जोड़कर न देखा जाए। यह केवल मेरी व्यक्तिगत अभिव्यक्ति है, जिसका उद्देश्य किसी की भावना को ठेस पहुँचाना या किसी प्रकार का दावा करना नहीं है
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें